और दूसरी थीं आपकी प्यारी बीवी हज़रत खदीजा (रज़ियल्लाहु अन्हा)..."
इन दोनों की वफात के बाद मक्का में हालात और ज्यादा खराब हो गए।
इस साल को इस्लामी इतिहास में “ग़म का साल” कहा जाता है।
अब नबी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने सोचा कि क्यों न मक्का के बाहर जाकर लोगों को इस्लाम की दावत दी जाए।
इसलिए आपने मक्का से लगभग 80 किलो…
और दूसरी थीं आपकी प्यारी बीवी हज़रत खदीजा (रज़ियल्लाहु अन्हा)..."
इन दोनों की वफात के बाद मक्का में हालात और ज्यादा खराब हो गए।
इस साल को इस्लामी इतिहास में “ग़म का साल” कहा जाता है।
अब नबी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने सोचा कि क्यों न मक्का के बाहर जाकर लोगों को इस्लाम की दावत दी जाए।
इसलिए आपने मक्का से लगभग 80 किलोमीटर दूर ताइफ़ शहर का रुख किया।
नबी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के साथ आपके वफादार सहाबी " ज़ैद इब्न हारिसा " भी थे।
दोनों ने पैदल ही ताइफ़ शहर का सफर किया।
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