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ଭାଗିଦାରୀ ଧ୍ୱନି

Text to Speech kokoro

रात के दो बजे थे। बारिश की बूंदें खिड़की पर जोर से टपक रही थीं। अजय अकेला अपने दादा के पुराने घर में था। घर में अजीब सी खामोशी थी… अचानक, ऊपर वाले कमरे से धीमी, दबती हुई आवाज़ें आईं। अजय ने हिम्मत करके सीढ़ियाँ चढ़नी शुरू की। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, कमरे में अँधेरा और भी गहरा हो गया। और तभी… उसने देखा एक साया जो उसके सामने था… लेकिन उसका अपना साया नहीं था। साया धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था… और तभी अजय की आखों के सामने सब कुछ गायब हो गया। क्या अजय फिर से अपनी आँखें खोलेगा? ये

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