उस दिन अरुण को नौकरी मिल गई।
जब वह घर लौटा और यह खबर अपने पिता को बताई…
रामू की आँखों से आँसू बहने लगे।
उसने आसमान की तरफ देखा और कहा—
आज मेरी मेहनत सफल हो गई।”
अरुण ने अपने पिता के पैर छुए।
उसने कहा—
“पापा, आज जो कुछ भी हूँ… आपकी वजह से हूँ।”
रामू मुस्कुराया और बोला—
“नहीं बेटा… यह तेरी मेहनत का फल है।”