महाभारत की एक छोटी लेकिन बहुत गहरी कहानी: युधिष्ठिर और कुत्ता
महाभारत युद्ध के बाद कई साल बीत गए। युधिष्ठिर ने राजपाट अपने पोते परीक्षित को सौंप दिया और भाइयों-द्रौपदी के साथ हिमालय की ओर चल पड़े — सशरीर स्वर्ग जाने के लिए।
रास्ते में एक पतला-दुबला कुत्ता भी उनके साथ चलने लगा था। वह कभी नहीं छूटा।
धीरे-धीर…
महाभारत की एक छोटी लेकिन बहुत गहरी कहानी: युधिष्ठिर और कुत्ता
महाभारत युद्ध के बाद कई साल बीत गए। युधिष्ठिर ने राजपाट अपने पोते परीक्षित को सौंप दिया और भाइयों-द्रौपदी के साथ हिमालय की ओर चल पड़े — सशरीर स्वर्ग जाने के लिए।
रास्ते में एक पतला-दुबला कुत्ता भी उनके साथ चलने लगा था। वह कभी नहीं छूटा।
धीरे-धीरे यात्रा कठिन होती गई। पहले द्रौपदी गिर पड़ीं (उनका प्रेम में पक्षपात था), फिर सहदेव (ज्ञान का घमंड), नकुल (सौंदर्य का अभिमान), अर्जुन (धनुर्विद्या का गर्व) और अंत में भीम (बल का अभिमान)।
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