तब तक महल के सिपाही आ गए। डाकू भाग खड़े हुए।
वीरेंद्र ने अर्जुन को देखा। मुंह से खून बह रहा था... कपड़े फट गए थे। फिर भी मुस्कुरा रहा था।
पूछा, "तुम ठीक हो?"
उस दिन वीरेंद्र रो पड़ा। पहली बार किसी ने उसकी जान की परवाह नहीं की थी।
हाथ पकड़ा अर्जुन का। बोला, "सुन... आज से तुम मेरे भाई हो। और जब मैं बड़ा हो…
तब तक महल के सिपाही आ गए। डाकू भाग खड़े हुए।
वीरेंद्र ने अर्जुन को देखा। मुंह से खून बह रहा था... कपड़े फट गए थे। फिर भी मुस्कुरा रहा था।
पूछा, "तुम ठीक हो?"
उस दिन वीरेंद्र रो पड़ा। पहली बार किसी ने उसकी जान की परवाह नहीं की थी।
हाथ पकड़ा अर्जुन का। बोला, "सुन... आज से तुम मेरे भाई हो। और जब मैं बड़ा होकर राजा बनूंगा... तुम्हें अपना सेनापति बनाऊंगा। पक्का वादा।"
दोनों ने हाथ मिलाया। उस दिन एक दोस्ती बनी... जो खून के रिश्ते से भी गहरी थी।
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फिर साल बीतते गए।
वीरेंद्र बड़ा हुआ...
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