🎭 “किरायेदार या मालिक?”
एक बड़े शहर के पुराने मोहल्ले में एक आदमी रहता था — नाम था राघव।
साधारण कपड़े, पैरों में घिसी हुई चप्पल, और आने-जाने के लिए पुरानी सी साइकिल। वह एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था।
मोहल्ले वाले अक्सर उसे देखकर कहते,
“बेचारा… पूरी ज़िंदगी किरायेदार ही रहेगा।”
राघव हर सुबह ठीक छह बजे घर से निकल जाता और देर शाम थका हुआ लौटता।
न किसी से ज़्यादा बात, न किसी से शिकायत।
लोग समझते थे कि वह कोई मामूली नौकरी करता होगा।
एक दिन अचानक मोहल्ले में खबर फैल गई कि जिस इमारत में सब