रात के ठीक 12 बजे… स्टेशन पूरी तरह खाली था।
हवा में एक अजीब सन्नाटा था… जैसे कोई देख रहा हो।
रवि आखिरी ट्रेन पकड़ने के लिए प्लेटफॉर्म पर खड़ा था।
अचानक… दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी… लेकिन अजीब बात ये थी कि उस समय कोई ट्रेन आने वाली नहीं थी।
ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर रुकी… दरवाजे अपने आप खुल गए।
अंदर पूरा डिब्बा खाली था… सिर्फ एक आदमी खिड़की के पास बैठा हुआ था… जिसका चेहरा अंधेरे में छिपा था।
रवि डरते-डरते अंदर गया… और जैसे ही वो उस आदमी के पास बैठा…
वो आदमी धीरे-धीरे उसकी तरफ मुड़ा…
उसकी आ