आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफ़िर ने समंदर नहीं देखा।"
"बेवक्त अगर जाऊँगा सब चौंक पड़ेंगे, एक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा।"
"टूटा हुआ दिल है, टूटे हुए ख़्वाब हैं, ज़िंदगी तू बता दे, तेरे क्या अज़ाब हैं?"
"हर तरफ़ से ज़ख्म ही ज़ख्म मिले हैं, क्या इसी को कहते हैं जीने के आदाब हैं?"
"हर खुशी में कोई कमी सी है, हर हँसी में कोई नमी सी है।"
"ज़िंदगी उस दौर से गुज़र रही है जहाँ दिल दुखता है और चेहरा हँसता है।"
"ज़रूरी नहीं कुछ गलत करने से ही दुःख मिले, हद से ज़्यादा अच्छे