गाँव वालों की बातें
गाँव के कुछ लोग अब भी रामू का मजाक उड़ाते थे।
एक दिन चाय की दुकान पर कोई बोला—
“रामू, तू अपने बेटे को इतना पढ़ा रहा है… क्या वह कलेक्टर बन जाएगा?”
सब लोग हँसने लगे।
रामू चुप रहा।
फिर उसने धीरे से कहा—
“अगर मेरा बेटा मेहनत करेगा, तो वह कुछ भी बन सकता है।”
उस दिन अरुण ने यह बात सुन ली।
उसने मन में ठान लिया—
“मैं एक दिन अपने पिता को गर्व महसूस करवाऊँगा।”