जैसे ही उसने हवेली की दहलीज लांघी, पीछे का दरवाज़ा ज़ोर से बंद हो गया। और उस रात, रतनपुर के लोगों ने साठ साल बाद पहली बार किसी के हँसने की आवाज़ सुनी।
अभी राज पूरी तरह खुला नहीं है... क्या राघव अपने पिता को वापस ला पाएगा या वह खुद उस हवेली का हिस्सा बन जाएगा?हवेली के भीतर कदम रखते ही राघव को ऐसा महसूस हुआ जैसे वह पानी की किसी ठंडी दीवार के पार निकल आया हो। बाहर जो सन्नाटा था, वह अंदर पहुँचते ही एक जीवंत शोर में बदल गया। झूमरों की रोशनी से हॉल जगमगा रहा था और हवा में चमेली के इत्र की महक घुली हुई