अर्जुन… क्यों कांप रहा है तेरा धनुष, जब तेरा लक्ष्य स्पष्ट है?
यह केवल कुरुक्षेत्र नहीं… यह तेरे धर्म की भूमि है। तू परिणाम से डर रहा है, जबकि तुझे केवल अपने कर्म पर अधिकार है, फल पर नहीं।
उठो अर्जुन। युद्ध इसलिए मत करो कि सामने वाले से घृणा है… युद्ध इसलिए करो क्योंकि तुम सत्य और धर्म के पक्ष में खड़े हो।
तेरा मन भ्रमित है, लेकिन तेरी आत्मा सत्य जानती है। तू केवल एक योद्धा नहीं… तू धर्म का रक्षक है।
क्या तुझे लगता है कि जीत ही सब कुछ है? नहीं। तेरी असली पहचान तेरी हिम्मत है — डर के बावजूद आ