पढ़ाई का जुनून
समय धीरे-धीरे बीतता गया।
अरुण पढ़ाई में और भी मेहनत करने लगा।
कभी-कभी वह रात के दो-दो बजे तक पढ़ता।
उसकी माँ कहती—
“बेटा, थोड़ा आराम भी कर लिया कर।”
लेकिन अरुण मुस्कुराकर कहता—
“माँ, अगर मैं अभी नहीं पढ़ूँगा तो पापा की मेहनत बेकार हो जाएगी।”
उसकी यह बात सुनकर माँ की आँखें भर आतीं।