एक जर्जर-सा घर… जिसकी दीवारों पर समय की दरारें साफ दिखती थीं।
उस घर के बाहर बैठी थी एक कमज़ोर, झुकी हुई बुज़ुर्ग औरत — गोमती।
उसकी आँखों में उम्र नहीं… इंतज़ार दिखता था।
👵 गोमती…
कभी इस घर की रानी थी।
तीन बेटे थे उसके —
राकेश, सुरेश और महेश।
तीनों को उसने अपने खून-पसीने से पाला था…
खुद भूखी रहकर उन्हें खिलाया…
दूसरों के घर बर्तन मांजकर, खेतों में काम करके…
लेकिन आज…
उसके पास बस एक टूटी चारपाई थी… और यादें।
📦 एक पुराना संदूक…
गोमती के पास एक लकड़ी का संदूक था…
जिसे वो हर रोज़ खोलती…
उसमें रखी थ