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साझेदारी ऑडियो

Text to Speech kokoro

शाम को जब वह घर लौटता, उसके कपड़े धूल से भरे होते और हाथों में छाले पड़ जाते। लेकिन जैसे ही वह घर के दरवाजे पर पहुँचता, उसका बेटा अरुण दौड़कर उसे गले लगा लेता। उस पल रामू की सारी थकान खत्म हो जाती। रामू अक्सर अपने बेटे से कहता— “बेटा… मैं चाहता हूँ कि तू मेरी तरह मजदूर न बने। तुझे पढ़कर बड़ा आदमी बनना है।” अरुण अपने पिता की आँखों में चमक देखता और धीरे से कहता— “हाँ पापा… मैं बहुत पढ़ूँगा।”

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