साहित्य प्रस्तुति में आज सुनीए... भीष्म साहनी जी की बहुत ही प्रसिद्ध कहानी
वाङ्चू,
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तभी दूर से वाङ्चू आता दिखाई दिया।
नदी के किनारे, लालमंडी की सड़क पर धीरे-धीरे डोलता-सा चला आ रहा था। धूसर रंग का चोग़ा पहने था और दूर से लगता था कि बौद्ध भिक्षुओं की ही भाँति उसका सिर भी घुटा हुआ है। पीछे शंकराचार्य की ऊँची पहाड़ी थी और ऊपर स्वच्छ नीला आकाश। सड़क के दोनों ओर ऊँचे-ऊँचे सफ़ेदे के पेड़ों की क़तारें। क्षण-भर के लिए मुझे लगा, जैसे वाङ्चू इतिहास के पन्नों पर से उतरकर आ गया है। प्राचीनकाल में इ