Chapter 3: आरव की जिंदगी ने लिया नया मोड़
थका हारा मैं फिर से चल पड़ा उस राह पर, जो शायद मुझे मेरी मंजिल की ओर ले जाती। मेरे कदमों की "धुप… धुप…" की आवाज उस खामोशी में और भी तेज सुनाई दे रही थी। दूर-दूर तक न कोई गाड़ी दिख रही थी, और न ही कोई इंसान। बस दो ही चीजें मेरे पास थीं — एक मेरे अंदर का खालीपन, और दूसरा ये टूटा-फूटा बॉक्स, जिसमें मेरी कुछ यादें जुड़ी हुई थीं।
आज ठंड भी ज्यादा थी। मैंने जब आसमान की तरफ देखा, तो वो भी मेरी तकलीफ देखकर बिल्कुल शांत लग रहा था। काले-काले बादल बारिश का माहौल बन