"देवता भयभीत हो गए।
कोई भी उस विष को संभाल नहीं पा रहा था…
तब सभी भगवान शिव के पास पहुंचे।"
"सृष्टि को बचाने के लिए, भगवान शिव ने बिना सोचे समझे वह विष पी लिया।
यह उनका सबसे बड़ा त्याग था।"
"माता पार्वती ने तुरंत शिव जी का गला पकड़ लिया,
ताकि विष उनके शरीर में फैल न सके।"
"विष शिव जी के कंठ में ही रुक गया…
और उनका कंठ नीला हो गया।
तभी से उन्हें 'नीलकंठ' कहा जाने लगा।"
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