जंगल के किनारे एक छोटी सी झोपड़ी में हारिस नाम का एक सीधा और मेहनती युवक रहता था। उसका जीवन बहुत साधारण था। हर सुबह वह नदी पर जाता, जाल डालकर मछलियाँ पकड़ता और उसी से अपना गुज़ारा करता। हारिस का दिल बहुत साफ था। वह हमेशा मानता था कि सच्चाई और सब्र इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है। एक दिन जब वह नदी में जाल…
जंगल के किनारे एक छोटी सी झोपड़ी में हारिस नाम का एक सीधा और मेहनती युवक रहता था। उसका जीवन बहुत साधारण था। हर सुबह वह नदी पर जाता, जाल डालकर मछलियाँ पकड़ता और उसी से अपना गुज़ारा करता। हारिस का दिल बहुत साफ था। वह हमेशा मानता था कि सच्चाई और सब्र इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है। एक दिन जब वह नदी में जाल डाल रहा था, अचानक उसके जाल में कोई भारी चीज़ फँस गई। उसने जाल खींचा तो देखा कि उसमें एक पुराना लोहे का संदूक था।