कल्पना कीजिए…
रात के लगभग दो बजे हैं।
एक मानसिक अस्पताल का कमरा…
दीवारें सफेद…
कमरे में हल्की सी दवाई की गंध…
और खिड़की के बाहर फैला हुआ अंधेरा आसमान।
उस खिड़की के पास एक दुबला-पतला आदमी खड़ा है।
उसकी आँखों में थकान है…
लेकिन अंदर कहीं गहराई में एक आग भी है।
वह आदमी है —
Vincent van Gogh