“आख़िरी दीपक”
बहुत समय पहले, पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसा एक छोटा सा गाँव था — चंद्रपुर। यह गाँव दिन में जितना सुंदर लगता था, रात में उतना ही डरावना हो जाता था। जैसे ही सूरज डूबता, लोग अपने घरों में बंद हो जाते और दरवाज़ों पर एक-एक दीपक जलाते।
कहा जाता था कि इस गाँव पर एक पुराना श्राप था — “जिस घर का दीपक बुझ गया, वहाँ से कोई सुबह नहीं देखता।”
गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वह बाकी लोगों से अलग था। जहाँ सब डरते थे, वहीं उसके मन में सवाल उठते थे — “आख़िर ये दीपक क्यों जलाना पड़ता है
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