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रामू ने अपनी पुरानी अलमारी खोली। उसमें कुछ पुराने कपड़े पड़े थे। उसने अरुण की तरफ देखा और धीरे से कहा— “बेटा… काश मैं तेरे लिए नए कपड़े खरीद पाता।” अरुण मुस्कुराया। उसने पिता का हाथ पकड़कर कहा— “पापा, कपड़े नहीं… मेहनत इंसान को बड़ा बनाती है।” रामू की आँखें भर आईं।

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