राहुल कोई फिल्मी हीरो नहीं था, बस एक साधारण लड़का था जो एक छोटे शहर में अपने पिता के साथ किराए के घर में रहता था; बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी क्योंकि घर चलाने के लिए पैसे नहीं थे, और कई महीनों तक नौकरी ढूँढने के बाद भी जब कुछ नहीं मिला तो एक दिन उसने तय किया कि अब इंतज़ार नहीं, कुछ छोटा ही सही खुद शु…
राहुल कोई फिल्मी हीरो नहीं था, बस एक साधारण लड़का था जो एक छोटे शहर में अपने पिता के साथ किराए के घर में रहता था; बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी क्योंकि घर चलाने के लिए पैसे नहीं थे, और कई महीनों तक नौकरी ढूँढने के बाद भी जब कुछ नहीं मिला तो एक दिन उसने तय किया कि अब इंतज़ार नहीं, कुछ छोटा ही सही खुद शुरू करना है—उसने उधार लेकर पुराने मोबाइल से लोकल दुकानों के लिए छोटे-छोटे पोस्टर और WhatsApp पर प्रचार करना शुरू किया, शुरू में लोग भरोसा नहीं करते थे, कई बार उसका मज़ाक भी उड़ाया गया, कुछ दिनों