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खामोश शुरुआत शहर की भीड़-भाड़ में भी कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो सबसे ज्यादा अकेले होते हैं। कबीर भी उन्हीं में से एक था। हर सुबह उसकी आँख खुलती, लेकिन उसके दिन में कोई नया उत्साह नहीं होता था। वो अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखता… लोग भाग रहे थे, गाड़ियाँ दौड़ रही थीं, जिंदगी आगे बढ़ रही थी… लेकिन कबीर? वो वहीं का वहीं था। उसका फोन अक्सर साइलेंट रहता था। कोई कॉल नहीं, कोई मैसेज नहीं… कभी-कभी वो खुद ही फोन खोलकर पुरानी चैट्स पढ़ता, सिर्फ यह महसूस करने के लिए कि कभी कोई था जो उससे बात करता था। उसकी

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