1932 का साल...
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तपते रेगिस्तान...
और धूल भरे मैदान...
दूर... क्षितिज पर...
धूल का एक विशाल गुबार उठता है...
पहली नज़र में लगता है...
जैसे कोई दुश्मन सेना हमला कर रही हो...
लेकिन...
ये सैनिक नहीं थे...
ये थे...
बीस हज़ार...
विशालकाय पक्षी...
इमू।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं...
दुनिया की सबसे खतरनाक मशीनगन...
लुईस गन...
इन पक्षियों के सामने...
बेअसर साबित हो जाएगी?
इतिहास इसे मज़ाक कहता है...
लेकिन...
जो वहाँ थे...
उनके लिए...
यह एक दुःस्वप्न था।
यह कहानी है...