तक तो ऐसा लगा जैसे उसने गलत फैसला ले लिया हो, लेकिन उसने हर दिन 8–10 दुकानों पर जाकर अपनी बात रखी, धीरे-धीरे एक दुकान ने उसे ₹500 का काम दिया, फिर दूसरी ने ₹1000 का, उसने एक भी रुपया बेकार खर्च नहीं किया और जो कमाया उसी से बेहतर फोन, फिर सस्ता लैपटॉप लिया, रात-रात भर YouTube से सीखता रहा और दिन में क…
तक तो ऐसा लगा जैसे उसने गलत फैसला ले लिया हो, लेकिन उसने हर दिन 8–10 दुकानों पर जाकर अपनी बात रखी, धीरे-धीरे एक दुकान ने उसे ₹500 का काम दिया, फिर दूसरी ने ₹1000 का, उसने एक भी रुपया बेकार खर्च नहीं किया और जो कमाया उसी से बेहतर फोन, फिर सस्ता लैपटॉप लिया, रात-रात भर YouTube से सीखता रहा और दिन में काम करता रहा, एक साल बाद उसके पास 20 से ज़्यादा छोटे क्लाइंट हो गए, और दो साल में वही लड़का जो नौकरी के लिए भटक रहा था, अब हर महीने ₹70-80 हजार कमा रहा था—उसकी ज़िंदगी एक दिन में नहीं बदली, लेकिन उसने