क्या आपने कभी खुद से यह सवाल किया है… कि जिस मोहब्बत को आप अपने दिल का सुकून समझते हैं, क्या वह वाकई सुकून है… या एक ऐसा धोखा जो धीरे-धीरे आपको अल्लाह से दूर कर रहा है? वह एहसास जो शुरू में बहुत पाकीज़ा लगता है, वह बातें जो दिल को अच्छा महसूस करवाती हैं, वह attention जो आपको खास बना देती है… क्या यह सब सच में मोहब्बत है, या एक इम्तिहान जिसे आप मोहब्बत का नाम दे बैठे हैं?
नामहरम की मोहब्बत हमेशा खूबसूरत लगती है… शुरुआत में। यह कभी गुनाह की तरह शुरू नहीं होती, बल्कि एक मासूम बातचीत से, एक casual c