शिवम, आप यहाँ हैं। यह पल सिर्फ आपका है।
आप जहाँ भी बैठे हैं — अपनी कुर्सी पर, अपने बिस्तर पर या ज़मीन पर — अपने आप को थोड़ा और आराम दें।
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें, लेकिन तनावरहित रहें।
अपने हाथ अपनी गोद में रखें — हथेलियाँ ऊपर की ओर — खुली, स्वीकार करने की मुद्रा में।
जैसे आप कह रहे हैं —
“मैं तैयार हूँ। मैं स्वीकार करता हूँ। मैं आने देता हूँ।”
सांस के साथ
अब हम पाँच गहरी साँसें लेंगे — मिलकर।
पहली साँस…
नाक से गहरी साँस अंदर लें… 1… 2… 3… 4…
धीरे-धीरे बाहर छोड़ें… 1… 2… 3… 4… 5… 6