1663 की एक अंधेरी रात… पुणे मुग़ल सेना से घिरा हुआ था। लाल महल पर साईस्थखान का कब्ज़ा था। यह वही लाल महल था जहाँ शिवाजी महाराज ने अपना बचपन बिताया था। यह अपमान सहना कठिन था।
साईस्थखान को पूरा विश्वास था कि अब शिवाजी कुछ नहीं कर पाएँगे। मुग़ल पहरा बहुत कड़ा था। लेकिन राजगढ़ किले पर एक गुप्त सभा चल रही थी। शिवाजी महाराज अपने विश्वासपात्र मावलों के साथ एक अनोखी योजना बना रहे थे।
सीधी लड़ाई नहीं… बुद्धि, साहस और छापामार नीति से वार करने का निर्णय हुआ।
रात होते ही शिवाजी और उनके मावले विवाह बारात का