कालू अपने ट्रैक्टर से स्टंट कर रहा होता है।
उसी समय गुरु वीर अपनी बहादुर गधेड़ी पर वहां से गुजर रहा होता है।
गुरु वीर कालू के पास जाता ता है और कहता है,
"ये स्टंट तो मैं भी कर सकता हूँ!"
कालू हंसते हुए कहता है,
"ठीक है
जैसे ही गुरवीर स्टंट करने की कोशिश करता है,
अचानक उसके ट्रैक्टर में आग लग जाती है।