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ଭାଗିଦାରୀ ଧ୍ୱନି

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नमस्ते दोस्तों, क्या आप कभी जंगल में अकेले गए हैं, या आप कभी जाने के बारे में सोचेंगे भी नहीं, क्योंकि आज मैं आपको भारत के सबसे बड़े शहर दिल्ली के पास एक छोटे से गाँव की डरावनी कहानी बता रहा हूँ, जहाँ 'लाल आँखों वाला साया' घूमता है, 23 मार्च 1995 की एक सच्ची घटना पर आधारित है, और आज भी गाँव वाले रात में बाहर नहीं निकलते हैं; गाँव में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था - माँ शीतल, बेटा दीपक 12 साल, और बेटी प्रिया 8 साल, उनके पिता की 5 साल पहले जंगल में एक जंगली जानवर के हमले में मृत्यु हो गई थी, लेकि

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