गाँव में एक पुरानी पगडंडी है जो सीधे घने जंगलों की तरफ जाती है। लोग कहते हैं कि उस रास्ते पर जो भी रात के 2 बजे के बाद गया, उसे किसी के चलने की आवाज़ तो सुनाई देती है, पर कोई दिखाई नहीं देता। कहानी का मुख्य पात्र 'राघव' एक रात मजबूरी में उस रास्ते से गुज़रता है। उसे कोहरे के बीच एक जलती हुई लालटेन दिखती है। वो उसके पीछे जाता है, लेकिन जैसे-जैसे वो पास पहुँचता है, लालटेन की रोशनी ठंडी और नीली होने लगती है।[narrator]