4 दिसंबर 1999। काठमांडू से दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814। पांच हथियारबंद युवक। एक ब्रीफकेस में पिस्तौल और चाकू। 155 बंधक।
भारत के सामने एक असंभव सवाल था – बंधकों की जान बचाएं, या तीन कैदियों को रिहा करें? भारत ने बंधकों को चुना। 31 दिसंबर 1999 को तीन कैदी रिहा किए गए – मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख, और मुश्ताक अहमद जरगर।
उस एक फैसले ने दक्षिण एशिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन को जन्म दे दिया। यह कहानी है – मसूद अजहर की। लेकिन असली विलेन सिर्फ एक इंसान नहीं… बल्कि एक पूरा सिस्टम है।