[happy] एक बार की बात है, हिमालय की गोद में बसा एक छोटा-सा गाँव था – ‘परियों का थाल’। वहाँ की ठंडी हवाएँ भी दिल को चीर जाती थीं। उस गाँव में रहती थी रिया, सोलह साल की अनाथ लड़की। उसके माता-पिता की मौत एक भयानक बर्फीली रात में हो गई थी। पहाड़ी नदी ने उनके घर को निगल लिया था। रिया बच गई थी, लेकिन उसकी आत्मा हर रात उस नदी के साथ बहती रहती थी।
दादी के पुराने झोपड़े में अकेली रहती रिया। दिन भर जंगल से लकड़ियाँ बटोरती, थककर चूल्हे के पास बैठ जाती। आँखों से आँसू बहते, लेकिन कोई नहीं पूछता – “बेटी, दर्द