वो रोज़ उसी स्टेशन पर उसका इंतज़ार करता था।
एक दिन वो आई, मुस्कुराई, और उसके पास बैठ गई।
बातें शुरू हुईं, खामोशियाँ भी अपनी लगने लगीं।
कुछ दिनों में इंतज़ार, आदत बन गया।
फिर एक दिन उसने कहा, “अब देर मत करना…”
और वो समझ गया—ये इंतज़ार ही उनका प्यार बन चुका है।