रात के करीब ढाई बजे का समय था। चारों तरफ घना अंधेरा और अरब सागर की लहरें... जो उस खामोशी में भी एक अजीब सी हलचल पैदा कर रही थीं। आसमान पर बादलों का पहरा था, जिसकी वजह से चाँद की रोशनी भी पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी। दूर-दूर तक अगर कुछ था, तो वो था सिर्फ काला पानी और वो नमकीन हवा जो किसी बड़े तूफान के आने का इशारा दे रही थी।उसी अंधेरे के साये को चीरते हुए एक बड़ा जहाज़ धीरे-धीरे, ... मुंबई की सरहद की तरफ बढ़ रहा था। बाहर से देखने में वो जहाज़ बिल्कुल शांत था,