रात के ठीक 2:17 बजे थे।
आसमान में चाँद तो था, लेकिन जैसे किसी ने उसकी रोशनी को निगल लिया हो। पूरा गाँव अजीब सन्नाटे में डूबा हुआ था। कुत्ते भी भौंकना भूल चुके थे… बस कभी-कभी हवा की सरसराहट सुनाई देती थी।
रवि उस रात अपने पुराने पुश्तैनी घर में अकेला था।
उसके दादा की मौत के बाद यह घर वर्षों से बंद पड़ा था। गाँव वाले हमेशा कहते थे—
"उस घर में मत जाना… वहाँ कुछ है…"
लेकिन रवि इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।