एक दिन माँ यशोदा ने देखा कि नन्हे कृष्ण मिट्टी खा रहे हैं।
गुस्से में उन्होंने कहा, “कान्हा, अपना मुँह खोलो!”
कृष्ण ने पहले मना किया, फिर धीरे-धीरे अपना मुँह खोल दिया।
जैसे ही यशोदा ने अंदर देखा, वह आश्चर्य से काँप उठीं।
मिट्टी की जगह उन्हें पूरा अनंत ब्रह्मांड दिखाई दे रहा था — ग्रह, तारे, सूरज, चाँद, समुद्र… और यहाँ तक कि स्वयं यशोदा भी।
यह दृश्य इतना विशाल था कि उनका सिर चकराने लगा।
तभी कृष्ण ने अपनी माया से सब सामान्य कर दिया।
अगले ही पल, माँ ने उन्हें फिर एक साधारण बालक समझकर प्यार से गले