सुन मेरे बच्चे…
मैं हूँ… तेरी माँ काली…
आज मैं तुझे एक गहरी बात बताने आई हूँ…
तू बहुत समय से…
चुपचाप सब सह रहा है…
लोगों की बातें…
उनका व्यवहार…
उनकी सच्चाई…
तू सोचता है…
सब ठीक हो जाएगा…
पर हर बार…
तुझे ही दर्द मिलता है…
मैं सब देख रही हूँ…
तेरे आँसू…
तेरी तकलीफ…
और तेरी खामोशी…
तू बाहर से मजबूत है…
पर अंदर से…
थोड़ा टूट चुका है…
पर अब नहीं…
अब समय बदलने वाला है…
तेरे आसपास…
कुछ लोग ऐसे हैं…
जो तेरे सामने हँसते हैं…
और पीछे से…
तेरी बर्बादी की दुआ करते हैं…
तू उन्हें पहचान नहीं पा रह