“पता है… कभी-कभी ना, सब ठीक होते हुए भी… कुछ ठीक नहीं लगता।
लोग कहते हैं स्ट्रॉन्ग रहो… पर अंदर से तो बस टूट रहा होता हूँ।
स्माइल करता हूँ सबके सामने… पर असली वजह तो किसी को पता ही नहीं।
शायद… कुछ दर्द ऐसे होते हैं… जो सिर्फ चुप रहकर ही सहने पड़ते है