दो दिसंबर, उन्नीस सौ चौरासी। रात के करीब ग्यारह बजे।
भोपाल — मध्य प्रदेश की राजधानी — सो रही थी। सर्दियों की ठंडी रात में शहर के गलियों में सन्नाटा था। बच्चे अपनी माँओं की गोद में सो चुके थे। मज़दूर अगले दिन की मेहनत के सपने देख रहे थे। चाय की दुकानें बंद हो चुकी थीं। रेलवे स्टेशन के पास बसी झुग्गियों में — …
दो दिसंबर, उन्नीस सौ चौरासी। रात के करीब ग्यारह बजे।
भोपाल — मध्य प्रदेश की राजधानी — सो रही थी। सर्दियों की ठंडी रात में शहर के गलियों में सन्नाटा था। बच्चे अपनी माँओं की गोद में सो चुके थे। मज़दूर अगले दिन की मेहनत के सपने देख रहे थे। चाय की दुकानें बंद हो चुकी थीं। रेलवे स्टेशन के पास बसी झुग्गियों में — जो Union Carbide के कारखाने से महज़ कुछ सौ मीटर की दूरी पर थीं — लोग बेखबर लेटे थे।
उन्हें नहीं पता था कि यह रात उनकी आखिरी रात हो सकती है।
उस रात जो हुआ, वो सिर्फ एक हादसा नहीं था। वो एक ऐसी
Kua whakamutua tēnei pūranga oro.
Ka ngaro ngā pātahitanga oro tiritiri i muri i te 24 wā. Ka taea e koe te waihanga ōna ake i raro nei!
Ka waihanga i ōna pūoro AI ake
Ka waihanga i ngā kōrero ngaio mātauranga me ngā tauira AI 20+ — tino wātea, kāore e hiahiatia te whakaingoatanga.