24 सितंबर 2014 सुबह के लगभग 8:00 बजे बेंगलुरु के इसरो कंट्रोल रूम में सन्नाटा पसरा हुआ था। वैज्ञानिकों की सांसे थमी हुई थी। आंखें स्क्रीन पर टिकी थी और पूरा देश टीवी के सामने बैठा दुआएं कर रहा था। क्योंकि उस एक पल पर टिका था। ₹450 करोड़ का मिशन। हजार से ज्यादा वैज्ञानिकों की मेहनत और सवा सौ करोड़ भारतीयों का सपना और फिर एक आवाज आई मार्स ऑर्बिट इंसर्शन सक्सेसफुल और उस पल भारत ने इतिहास रच दिया। लेकिन दोस्तों यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं है। यह कहानी है नाकामियों की, गिरने की, संभलने की और फिर