बस यही बात चारों दोस्तों के दिमाग में बैठ गई।
उन्होंने तय किया कि वे उसी रात हवेली जाएंगे।
रात के करीब 11 बजे चारों दोस्त टॉर्च और कैमरा लेकर जंगल की तरफ निकल पड़े।
जंगल में अजीब सा सन्नाटा था।
सिर्फ हवा की आवाज आ रही थी।
पेड़ों की शाखाएं हिल रही थीं।
कभी-कभी ऐसा लगता जैसे कोई उन्हें दूर से देख रहा हो।
करीब 40 मिनट चलने के बाद वे हवेली के सामने पहुंचे।
हवेली बहुत बड़ी थी।
लेकिन पूरी तरह खंडहर बन चुकी थी।
दीवारों पर काई जमी हुई थी।
खिड़कियां टूटी हुई थीं।
मुख्य दरवाजा आधा खुला था।
हवा चलती तो दरव