सुबह-सुबह गांव की हल्की ठंडी हवा चल रही थी। एक प्यारी सी गांव की लड़की अपने खेत की तरफ निकलती है। पेड़ों पर लटके हुए ताज़ा-ताज़ा संतरे देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
वो धीरे-धीरे संतरे तोड़ती है, दुपट्टा संभालते हुए टोकरी भर लेती है और घर की ओर चल पड़ती है।
घर आकर सबसे पहले वो संतरे को नमक वाले पानी में अच्छे से धोती है, क्योंकि उसे पता है साफ-सफाई बहुत जरूरी है।
फिर आंगन में बैठकर बड़े प्यार से संतरे छीलती है। खुशबू से पूरा माहौल महक उठता है।
अब वो एक बर्तन में सारे संतरे डालकर हाथों से