रात का समय था…
शहर से दूर बसा एक छोटा सा गांव कालीनगर…
जहाँ शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता था।
आसमान में काले बादल थे…
और ठंडी हवा के झोंके…
एक पुरानी हवेली की टूटी खिड़कियों से गुजरते हुए
डरावनी आवाज़ें पैदा कर रहे थे…
गांव के लोग उस हवेली के पास से भी नहीं गुजरते थे…
कहते थे…
“वहाँ… कोई है…”
उस रात…
बस ड्राइवर राजू खाली सड़क से गुजर रहा था…
अचानक…
उसने रियर मिरर में देखा…
पीछे वाली सीट पर…
कोई बैठा हुआ था…
सफेद कपड़ों में…
चेहरा धुंधला…
राजू बोला —
“अरे भाई, टिकट तो ले लो…”
कोई जवाब नहीं