---
साल 1996…
आसमान में एक जवान लड़का छलांग लगाता है…
सब कुछ ठीक लग रहा था…
लेकिन एक पल में… सब बदल गया।
पैराशूट ठीक से नहीं खुला।
और उस दिन… सिर्फ उसका शरीर नहीं गिरा…
उसकी पूरी ज़िंदगी टूट गई।
---
अस्पताल के कमरे में…
न कोई ताकत… न कोई हरकत…
सबसे बड़ा दर्द शरीर का नहीं था…
बल्कि अपनी पहचान खोने का था।
“अगर मैं मजबूत नहीं रहा… तो मैं कौन हूं?”
उस पल… उनके सामने दो रास्ते थे:
या तो वो हार मान लेते…
या खुद को दोबारा बनाते।
उन्होंने सच को स्वीकार किया…
लेकिन हार मानने से इंकार कर दिया