कहानी की शुरुवात होती है —
भाई, बत्तीस साल की उम्र में अगर तुम्हारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो कि तुमने सोफ़े पर लेटे-लेटे पूरी एक सीरीज़ देख ली — तो दुनिया तुम्हें क्या कहती है, वो तुम जानते हो। पर तुम यह भी जानते हो कि उस सोफ़े से उठना कितना भारी लगता है। जैसे कोई अदृश्य हाथ हो जो नीचे खींच रहा हो। जैसे बाहर की दुनिया और तुम्हारे बीच में शीशे की एक दीवार हो — सब दिखता है, पर जाया नहीं जाता।
Ichiko Saito ऐसी ही थी।
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