घर अब घर नहीं रहा था…
वो एक खामोश कब्र जैसा हो चुका था…
दो बेटियाँ… रीमा और नेहा…
दोनों बिना कोई निशान छोड़े गायब…
माँ-बाप की हालत खराब थी…
लेकिन असली डर अभी बाकी था…
क्योंकि…
अब उस घर में कोई तीसरा भी था…
👁️ नई मौजूदगी…
उस रात…
रीमा की माँ अचानक नींद से उठी…
उन्हें लगा… किसी ने उनके कान के पास धीरे से कहा—
“माँ…”
वो घबराकर उठ बैठीं…
कमरे में कोई नहीं था…
लेकिन… दरवाज़े के बाहर…
बाथरूम की लाइट अपने आप जल रही थी…
उनका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा…
धीरे-धीरे… वो बाथरूम की तरफ बढ़ीं…
🚪 डर का दरवाज