सुनकर शारदा ने चौखट पर हल्दी छिड़की।
नींबू-मिर्च टांगी।
और तुलसी के पास माता रानी के नाम का छोटा-सा दीपक जला दिया।
लेकिन सुनीता का डर किसी और वजह से बढ़ रहा था।
क्योंकि रात होने से पहले…
रमेश ने फोन पर आखिरी बार बस इतना कहा था…
“अगर मैं देर से आऊं… तो मेरे नाम पर भी दरवाज़ा मत खोलना…”[narrator]