रेगिस्तान में कोई रहम नहीं था।
हर दिन सूरज आग की तरह जलता था।
वहीं एक बूढ़ी औरत और उसका साथी,
एक छोटा सा बंदर, रहते थे।
उनके पास कोई घर नहीं था,
सिर्फ एक फटा हुआ कपड़ा था।
बूढ़ी औरत थक चुकी थी,
लेकिन बंदर उम्मीद नहीं छोड़ता था।
एक दिन, भयानक गर्मी में,
बंदर को कुछ अजीब मिला—बर्फ का टुकड़ा।
वह उसे बूढ़ी औरत के पास ले गया।
रेत के नीचे,
बर्फ से भरा एक डिब्बा छुपा था।
उम्मीद की एक किरण जगी।
उन्होंने मिलकर बर्फ से घर बनाना शुरू किया।
बर्फ पिघल रही थी,
लेकिन वे रुके नहीं।
धीरे-धीरे एक छोटा सा
ठं