गाँव की पगडंडियों, पुराने पीपल के पेड़ों और ढलते सूरज की लालिमा के बीच छिपे रहस्यों का अपना ही एक रोमांच होता है। आपकी पसंद के अनुसार, मैंने एक ऐसी कहानी की रूपरेखा और उसका **पहला भाग** तैयार किया है जो सस्पेंस और 'गाँव के असली टच' से भरपूर है।
इस कहानी का शीर्षक है: **"पीपल वाली हवेली का आखिरी दीया"**
गाँव 'रतनपुर' देखने में तो किसी भी आम भारतीय गाँव जैसा था—हरे-भरे खेत, चहचहाते पक्षी और शाम को चौपाल पर जमने वाली महफ़िलें। लेकिन इस गाँव की एक रीत थी जिसे बरसों से निभाया जा रहा था। सूरज ढलते ही